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आल्हा खण्ड: ५२ लड़ाइयों का वृत्तांत (नारायण प्रसाद सीताराम जी)
बुंदेलखंड

आल्हा खण्ड: ५२ लड़ाइयों का वृत्तांत (नारायण प्रसाद सीताराम जी)

रचयिता / लेखक नारायण प्रसाद सीताराम जी (Narayan Prasad Sitaram Ji)

यह ग्रंथ Internet Archive (इंटरनेट आर्काइव) से पठन एवं डाउनलोड हेतु उपलब्ध है।

पुस्तक परिचय एवं ऐतिहासिक संदर्भ (Description)

आल्हा खण्ड: ५२ लड़ाइयों का संपूर्ण वृत्तांत (वेद निधि वाराणसी संग्रह)

नारायण प्रसाद सीताराम जी द्वारा संपादित 'आल्हा खण्ड' का यह अत्यंत प्राचीन और वृहद संस्करण है। इस ग्रंथ में महोबा के बनाफर वीरों—आल्हा, ऊदल, मलखान, लाखन और राजा परमाल द्वारा लड़ी गई बावन लड़ाइयों की विस्तृत सूची और उनका पद्यबद्ध वर्णन मिलता है।

इसके आरंभिक पृष्ठों में महाभारत वीरों के कलयुगी अवतार का उल्लेख तथा ५२ लड़ाइयों की संपूर्ण अनुक्रमणिका दी गई है। यह दुर्लभ डिजिटल प्रति 'वेद निधि न्यास, वाराणसी' (स्वामी आत्मानंद गिरि प्रभुजी संग्रह) के सौजन्य से संरक्षित की गई है।
भूमिका
प्रगट हो कि जब युधिष्ठिर आदि पांडवों और दुर्योधन आदि कौरवों का कुरुक्षेत्र के मैदान में महा भारत युद्ध हुआ । उस युद्ध में श्रीकृष्ण चन्द्रजी की सहायता से पांडवों की जीत हुई । अन्त में भीमसेन आदि ने श्रीकृष्ण चन्द्रजी से प्रार्थना पूर्वक कहा कि हमारी इच्छा युद्ध से पूर्ण नहीं भये । इस कारण आप यह वर दीजिये कि कलियुग में हम युद्ध कर अपनी इच्छा पूर्ण करें, यह सुन श्रीकृष्णजी ने सोचा कि असन्तुष्ट होने से इनको अभिमान होगया है अब कौरवों के हाथ से इनकी मृत्यु कराय इनको स्वर्ग लोक पहुँचाऊँ । यह सोच कर श्रीकृष्ण जी बोले कि अच्छा तुम्हारी इच्छा पूर्ण होगी । सोई कलियुग में युधिष्ठिर जी आल्हा हुए । भीमसेन ऊदन हुए ॥ अर्जुन ब्रह्मानन्द हुए । नकुल लाखनिराना हुए । सहदेव वीर मलिखान हुए । अभिमन्यु इन्दल हुए । कौरवों में राजा दुर्योधन पृथ्वी राज हुए । दुस्सासन धाँधू हुआ । कर्ण ताहर हुए । द्रोणाचार्य चौड़ा ब्राह्मण हुए । इस प्रकार ये सब प्रगट हुए । और युद्ध करके अन्त में सब स्वर्ग गामी हुए । आगे आल्ह खण्ड सम्बन्धी शूर बीरों का संक्षेप हाल लिखते हैं ॥

राजा परिमाल ( चँदेले ) का हाल ।

कलियुग के कुछ वर्ष बीते नगर चँदेली चन्द्रवंशीय क्षत्रिय चन्द्रब्रह्म धर्मात्मा और न्यायी राजा हुए । महाराज चन्द्रब्रह्म को चन्द्रदेव ने प्रसन्न होकर पारस मणि दी उस पारस के स्पर्श से लोहा सुवर्ण होजाता था । इस प्रभाव से चन्द्रब्रह्मजी ने अनेक यज्ञ किये और बहुत सेना एकत्र कर अनेक राजाओं को जीता और कालिंजर में किला बनवाया चन्द्रब्रह्म के मंत्री चिंतामणि

तोमर वंशीय क्षत्रिय थे, चन्द्रब्रह्म के पुत्र वीरब्रह्म वीरब्रह्म के रूप चन्द्र रूपचन्द्र के बज्रब्रह्म बज्रब्रह्म के वन्दन, वन्दन के जगद्ब्रह्म, जगद्ब्रह्म के सत्यब्रह्म सत्यब्रह्म के सूर्यब्रह्म, सूर्यब्रह्मने एक सूर्य कुण्ड बनवाया, सूर्यब्रह्मके मदन ब्रह्म, मदन ब्रह्मके नाम का एक मदनताल प्रसिद्ध है, मदन ब्रह्मके कीर्ति ब्रह्म कीर्ति ब्रह्मके नामसे कीरति सागर प्रसिद्ध है, महाराज कीर्तिब्रह्मके यहाँ बीस लाख सेना थी । कीर्तिब्रह्म के पुत्र परिमाल ( चँदेले ) हुए । परिमाल ने तीर्थ यात्रा करके बहुत दान ब्राह्मणों को दिया और उस समय के प्रायः सभी राजा को युद्ध से, मित्रता से धन से अपने वशमें करके अमर नाथ गुरुकी आज्ञासे अपनी खाँड़ा सागर में पखार दिया और गुरुकी शपथ करली फिर किसी अस्त्र शस्त्र को हाथ नहीं लगाया इसी कारण युद्ध के नामसे काँप जाते थे एकतो वृद्धावस्था दूसरे अस्त्र शस्त्र के लिये गुरु की शपथ तीसरे अपनी कीर्ति में धब्बा लगजाने का भय था ॥ राजा परिमाल के पूर्व वंशमें एक कन्या चंपावती राठौर वंशीय क्षत्रिय महाराज कन्नौजी को ब्याही थी उसी वंशमें राजा जयचन्द जी थे ॥

राजा परिमाल का विवाह ।

राजा बासुदेव का दूसरा नाम मालवंत था सो महोबे के राजा थे बासुदेव के पुत्र १ माहिल २ भोपति, और मल्हना आदि कन्यायें थीं मल्हना के रूपकी बड़ाई सुन कर राजा परिमाल ने महोबे पर चढ़ाई की और बासुदेव माहिल व भोपति को जीत लिया तब बासुदेव ने हार मान कर मल्हना का विवाह परिमाल के साथ कर दिया, मल्हना ने चँदेली में रहना अङ्गीकार नहीं किया तब परिमाल के कहने से महोबा खाली कर दिया और आप जाकर उरई में रहे ! परिमाल ने अपनी दूसरी रानियों को भी महोबे में लाकर मल्हना सहित महोबे में निवास किया । कुछ समय बीते

बासुदेव परलोक गामी हुए उरई का राज्य माहिल करने लगे माहिल ने राजा परिमाल से चुगली माफ कराली थी और परिमाल से बदला लेने के दाव घात में लगे रहा करते थे माहिल परिहार क्षत्रीय थे लिल्ली घोड़ी सवारी में थी, माहिल की चुगली पर राजा परिमाल का ध्यान बहुत कम था । इसके परिणाम में पीछे से सर्वनाश होगया ।

ग्रंथ विवरण एवं संदर्भ तालिका (Specifications)

संस्करण (Edition)
प्राचीन दुर्लभ संस्करण
भाषा (Language)
hi

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